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Glossary / Real Estate Terms
शब्दावली/रीयल एस्टेट शब्दावली
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(7/23 और 5/25 मोर्टगेज़): क्रमश: सात वर्षों और पाँच वर्षों के बाद एक-मुश्त दर समायोजन वाली गिरवी।
ARMs(3/1, 5/1, 7/1 और 10/1 एआरएम): एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ जिसमें दर को क्रमश: तीन वर्ष, पाँच वर्ष, सात वर्ष और दस वर्ष की अवधि के लिए तय किया जाता है, लेकिन बाद में वार्षिक आधार पर समायोजित किया जा सकता है।
( एक्सलरेशन) : गिरवीकर्ता (motrgagee) (कर्ज़दार) की चूक के कारण बकाया गिरवी कर्ज़ के तत्काल भुगतान करने की मांग, अथवा बिक्री-पर-देय (due-on-sale) शर्त में दिए गए अधिकार का इस्तेमाल करने का गिरवी रखने वाले (mortgager) (कर्ज ़दाता ) का अधिकार।
(एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़) : एक कर्ज़ जिस पर मासिक भुगतान में एआरएम ब्याज दर इंडेक्स में बदलावों के आधार पर समय-समय पर बढ़ोतरी अथवा कमी होगी। एआरएम भुगतानों का समायोजन प्रत्येक छ: माह अथवा वर्ष में एक बार किया जाता है। सामान्य इंडेक्सों जिनसे एआरएम जुड़े होते हैं, में 11वां डिस्ट्रिक्ट कोस्ट ऑफ फंड्स, एक वर्षीय टी-नोट और छ:माही टी-नोट शामिल हैं।
(एडजस्टिड बेसिस) : मूल्य में किसी भी प्रकार की कमी को घटाने के बाद प्रॉपर्टी की कीमत और प्रॉपर्टी के सुधार के लिए खर्च की गई पूंजी की कीमत का जोड़।
(एडजस्टमेंट डेट) : एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ पर ब्याज दर में बदलाव की तारीख।
(एडजस्टमेंट इंटरवल) : ब्याज दर में एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ और/अथवा मासिक भुगतान में बदलाव के बीच का समय, जो आम तौर पर इंडेक्स के आधार पर एक, तीन अथवा पाँच वर्ष है।
(एडजस्टमेंट पीरियड): एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ के लिए एडजस्टमेंट तारीखों के बीच का समय।
(अफोर्डेबल एनालिसिस): एक घर खरीदने की खरीददार की क्षमता का मूल्यांकन करना। इसमें आमदनी, देनदारियों और मौजूदा धनराशि को देखा जाता है। इसमें आप मोर्टगेज़ की किस किस्म का उपयोग करने की योजना बना रहे हैं, वह इलाका जहां आप घर खरीदना चाहते हैं और संभावित अंतिम लागतों पर विचार किया जाता है।
(एमोर्टाइजेशन):मासिक (किश्त) भुगतानों के जरिए मोर्टगेज का नियमित भुगतान। मोर्टगेज़ के शुरूआती वर्षों में ज्यादातर मासिक भुगतान ब्याज़ में चला जाता है। बाद में, भुगतान का ज्यादातर हिस्सा कर्ज़ के बकाया मूल धन को घटाने में इस्तेमाल होता है।
(एमोर्टाइजेशन टर्म): मोर्टगेज़ कर्ज़ के भुगतान की समय-सीमा जो महीनों में होती है। उदारहण के लिए, 30 वर्ष की तयशुदा दर की गिरवी के लिए 360 महीने कर्ज़ वापसी की समय-सीमा है।
(एनुअल परसेंटेज रेट):ब्याज़, कर्ज ़ की फीस और दूसरे खर्चों सहित मोर्टगेज़ की वार्षिक लागत को कर्ज़ की रकम का प्रतिशत कहा जाता है।
(एप्रैज़ल/एप्रैज्ड वैल्यू):रीयल एस्टेट का मूल्यांकन करने वाले के द्वारा बताई गई घर की बाज़ार कीमत।,
(आर्बिट्रेशन): इस शब्द का इस्तेमाल किसी विवाद को सुलझाने के लिए आमतौर पर पार्टियों के बीच अदालत के बाहर हुए समझौते के लिए किया जाता है। वास्तव में आर्बिट्रेशन विवाद सुलझाने का एक तरीका है जहां पार्टियां एक निष्पक्ष व्यक्ति जिसे आर्बिट्रेटर कहा जाता है, के सामने दलीलें और सबूत पेश करती हैं और वह व्यक्ति सबूतों और दलीलों के आधार पर फैसला सुनाता है जिसे अवार्ड कहा जाता है।
(एसेसमेंट): किसी प्रॉपर्टी पर एक खास सामाजिक उद्देश्य जैसे सीवर या स्ट्रीटलाइटों आदि के लिए लगाया गया स्थानीय टैक्स।
(एसाइनमेंट): करार के हितों या जिम्मेदारियों का एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को स्थानांतरण, जैसे किसी गिरवी की देनदारी का स्थानांतरण। एसाइनमेंट एक कानूनी शब्द है जिसका इस्तेमाल हितों का एक करार से दूसरे करार में स्थानांतरण के लिए किया जाता है।
(एज्यूमेबल मोर्टगेज़): एक एज्यूमेबल मोर्टगेज़ का विक्रेता से नए खरीददार को स्थानांतरण किया जा सकता है। इसमें आमतौर पर नए खरीददार की हैसियत को परखने की जरूरत होती है और कर्ज ़ दाता इसके लिए फीस वसूल सकता है। यदि मोर्टगेज़ में बिक्री-पर-देय शर्त शामिल है, तो नया खरीददार मोर्टगेज़ को नहीं ले सकता।
(एजम्प्शन): विक्रेता और खरीददार के बीच एक करार जिसमें खरीददार विक्रेता से एक मौजूदा मोर्टगेज़ पर भुगतान प्राप्त करता है। किसी कर्ज़ को स्वीकार करने से आमतौर पर खरीददार का पैसा बचाता है क्योंकि इसमें एक मौजूदा मोर्टगेज़ कर्ज़ को स्वीकार किया जाता है जबकि एक नए मोर्टगेज़ पर बंदी लागत और बाज़ार दर पर ब्याज लगेगा।
Assumption Fee:
(एजम्प्शन फीस): एजम्प्शन के समय आमतौर पर जायदाद खरीदने वाला कर्जदाता को फीस का भुगतान करता है।
(बलून मोर्टगेज़): एक ऐसा कर्ज़ जिसका भुगतान कर्ज़ की समय-सीमा से ज्यादा अवधि में किया जाता है। आमतौर पर इसका अर्थ 30-वर्षीय भुगतान और एक पाँच वर्ष की अवधि होता है। कर्ज़ की अवधि की समाप्ति पर, कर्ज़ का बकाया मूलधन देना होता है।
(बलून पेमेंट): एक बलून मोर्टगेज़ के पूरा होने की तारीख पर अंतिम रूप से एकमुश्त भुगतान।
(बाइवीकली पेमेंट मोर्टगेज़): स्टैंडर्ड मासिक भुगतान के तरीके के बजाय प्रत्येक दो सप्ताहों में मोर्टगेज़ भुगतान की एक योजना। यदि लिया गया कर्ज़ स्टैंडर्ड 30-वर्षीय स्थाई -दर मोर्टगेज़ था तो मासिक भुगतान के आधे के बराबर दो-दो सप्ताहों के 26 (या 27) भुगतानों की जरूरत पड़ेगी। इसके परिणामस्वरूप कर्ज़ लेने वाले को ब्याज में अच्छी-खासी बचत होती है।
(ब्लैंकेट मोर्टगेज़): एक ऐसा मोर्टगेज़ जो उसी मोर्टगेज़ के लिए जमानत के तौर पर जायदाद के कम से कम दो हिस्सों को कवर करता है।
(कर्ज़ लेने वाला):वह व्यक्ति जो पूरा कर्ज़ चुका देने की नीयत से मोर्टगेज़ के रूप में कर्ज़ के लिए आवेदन करता है और कर्ज़ प्राप्त करता है।
(ब्रिज़ लोन): एक दूसरा ट्रस्ट जिसमें कर्ज़ लेने वाले के मौजूदा घर की जमानत है, मौजूदा घर बेचने से पहले एक नए घर की क्लोज़िंग करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे “स्विंग लोन” भी कहा जाता है।
(ब्रोकर): एक ऐसा व्यक्ति जो अपने क्लाइंट के लिए रकम का इंतजाम अथवा सौदेबाजी करता है लेकिन जो खुद कर्ज़ नहीं देता। आमतौर पर ब्रोकर अपनी सेवाओं के बदले फीस या कमीशन लेते हैं।
(बाय-डाउन): जब कर्ज़दाता और/अथवा होमबिल्डर कर्ज़ के पहले कुछ वर्षों के दौरान ब्याज दर में कमी करके मोर्टगेज़ की लागत में कमी करता है। हालांकि शुरू में भुगतान कम होता है, लेकिन सब्सिडी खत्म होने के बाद यह बढ़ जाएगा।
(कैप्स):एक एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ के लिए सीमा का प्रावधान कि प्रत्येक समायोजन अवधि (अर्थात् प्रत्येक छ: माह, वर्ष में एक बार) अथवा कर्ज़ की पूरी अवधि (रेट कैप) के दौरान ब्याज में कितना बदलाव हो सकता है। भुगतान कैप इस बात की बंदिश लगाती है कि कर्ज़ पर देय भुगतान कितना बढ़ अथवा घट सकता है।
(कैश फ्लो): आमदनी कराने वाली एक प्रॉपर्टी से एक निश्चित समय में मिलने वाली रकम। कैश फ्लो इतना होना चाहिए कि उससे आमदनी कराने वाली प्रॉपर्टी के खर्चों (मोर्टगेज़ का भुगतान, रखरखाव, उपयोगी वस्तुएं आदि) का भुगतान किया जा सके।
(सर्टिफिकेट ऑफ एलिजिबिलेटी): योग्यता प्राप्त बुजुर्गों को दिया गया दस्तावेज जो उन्हें घर, बिज़नेस और मोबाइल घरों के लिए वीए-गारंटिड कर्ज़ लेने के योग्य बनाता है। यह सर्टिफिकेट स्थानीय वेटरन्स अफेयर्स ऑफिस को VA form 1880 (सर्टिफिकेट ऑफ एलिजिबिलेटी) के साथ फॉर्म DD-214 (सैपरेशन पेपर) भेजकर प्राप्त किया जा सकता है।
Certificate of Reasonable Value (CRV):
(सर्टिफिकेट ऑफ रीज़नेबल वैल्यू):वेटरन्स अफेयर्स द्वारा जारी एक मूल्यांकन दस्तावेज जिसमें प्रॉपर्टी की मौजूदा बाज़ार कीमत दर्शाई जाती है।
(सर्टिफिकेट ऑफ वेटरन स्टेटस): वेटरन्स अथवा रिजर्विस्ट्स जिन्होंने लगातार 90 दिनों की सक्रिय ड्यूटी (ट्रेनिंग समय सहित) की है, को दिया गया दस्तावेज। यह प्रमाणपत्र स्थानीय वेटरन्स अफेयर्स ऑफिस को फॉर्म 26-8261a (वेटरन स्टेटस के प्रमाणपत्र के लिए अनुरोध, यह दस्तावेज चुनिंदा एफएचए-इंश्योर्ड कर्ज़ों पर नकद भुगतानों को कम कराने में वेटरन्स की मदद करता है।) के साथ DD-214 भेजकर प्राप्त किया जा सकता है।
(चेंज फ्रीक्वेंसी): एक एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ पर भुगतान और/अथवा ब्याज दर की बदलती हुई आवर्ती।
(क्लोजिंग): एक मीटिंग जिसमें घर की बिक्री को अंतिम रूप दिया जाता है। खरीददार मोर्टगेज़ पर दस्तखत करता है, अंतिम रूप से तय की गई कीमत का भुगतान करता है और घर का मालिकाना हक प्राप्त करता है। विक्रेता क्लोजिंग लागत का भुगतान करता है और घर की बिक्री की पूरी रकम प्राप्त करता है।
(क्लोजिंग कोस्ट्स): एक घर की बिक्री के वक्त खरीददारों और विक्रेताओं द्वारा वहन किए जाने वाले घर की कीमत के अलावा हुए खर्च। आमतौर पर क्लोजिंग कोस्ट्स में एस्क्रो शुल्क, टाइटल बीमा शुल्क, दस्तावेज दर्ज़ कराने का शुल्क और रीयल एस्टेट कमीशन शामिल होता है।
( सीओएफआई ) : एक कोस्ट-ऑफ-फंड्स इंडेक्स के आधार पर समायोजित एक एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ जो आम तौर पर 11वां डिस्ट्रिक्ट कोस्ट ऑफ फंड्स होता है।
(कंस्ट्रक्शन लोन): बिल्डिंग या घर बनाने के लिए एक अल्पकालिक अंतरिम कर्ज़। इन्हें आमतौर पर निर्माण की प्रगति के हिसाब से बिल्डर को दिया जाता है।
) (कंज्यूमर रिपोर्टिंग एजेंसी या ब्यूरो): यह एक संगठन है जो एक संभावित कर्ज़ लेने वाले के बारे में उसके कर्जों के इतिहास पर रिपोर्ट तैयार करने का काम करता है। यह एजेंसी इन रिपोर्टों के लिए क्रेडिट रिपोजिटरी और दूसरी जगहों से आंकड़े हासिल करती है।
(कंटिन्जेंसी): यह एक ऐसी शर्त है जिसे करार करने से पहले पूरा किया जाना जरूरी है।
(कांट्रेक्ट सेल अथवा डीड): कुछ शर्तें पूरी करने के बाद मालिकाना हक के लिए जायदाद के खरीददार और विक्रेता के बीच एक करार। यह एक तरह की इंस्टालमेंट बिक्री है।
(कन्वेंशनल मोर्टगेज़): यह कर्ज़ न तो फेडरल या राज्य सरकार द्वारा दिया जाता है और न ही इस पर कोई सरकारी गारंटी या बीमा होता है।
(कन्वर्शन क्लॉज़): एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ का एक प्रावधान जिससे कर्ज़ की अवधि के दौरान किसी समय कर्ज़ को स्थाई-दर मोर्टगेज़ में बदला जा सकता है। आमतौर पर इस तरह के बदलाव की पहली एडजस्टमेंट अवधि में इजाजत दी जाती है। यह बदलाव कराने पर अलग से लागत लगती है।
Counteroffer:
(काउंटरऑफर): एक मूल पेशकश के जवाब में की गई पेशकश।
(क्रेडिट रिपोर्ट): यह एक रिपोर्ट होती है जिसमें कर्ज़ लेने वाले का कर्ज़ का इतिहास और कर्ज़ लेने की मौजूदा हैसियत का ज़िक्र होता है।
(क्रेडिट रिस्क स्कोर): क्रेडिट रिस्क स्कोर एक उपभोक्ता की क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज़ जानकारी का सांख्यिकीय संक्षेप होता है। ज्यादातर फेयर, इसाक और FICO (फिको ) स्कोर नाम के क्रेडिट रिस्क स्कोर का प्रचलन हैं। क्रेडिट स्कोर करने के इस तरीके में गणितीय संक्षिप्त गणना होती है जो क्रेडिट रिपोर्ट की जानकारी के अलग-अलग हिस्सों को संख्यात्मक मान प्रदान करती है। सकल क्रेडिट रिस्क स्कोर मोर्टगेज़ कर्ज़ के लिए कर्ज़ देने की प्रक्रिया से बहुत ज्यादा जुड़ा होता है।
(डिफॉल्ट): करार की कानूनी जिम्मेदारियों को पूरा न करना, खास तौर पर मोर्टगेज़ पर मासिक भुगतान करने में असफल रहना।
(डिफर्ड इंटरेस्ट): जब कोई गिरवी करार ऐसी मासिक किश्तों के साथ किया गया हो जो नोट रेट को पूरा करने में जरूरत से कम हो तो बकाया ब्याज को बकाया कर्ज़ में जोड़कर आस्थगित कर दिया जाता है।
Delinquency:
(डेलिक्वेंसी): समय पर भुगतान न करना। इसके कारण करार को वक्त से पहले खत्म किया जा सकता है।
(डिपार्टमेंट ऑफ वेटरन्स अफेयर्स):फेडरल सरकार की एक स्वतंत्र एजेंसी जो योग्य बुजुर्गों के लिए लंबी अवधि, कम या बिना नकद भुगतान वाले गिरवी करारों की गारंटी देती है।
Debt-To-Income (DTI) Ratio: (डेबिट-टू-इनकम रेशो): मासिक कर्ज़ भुगतानों और कुल मासिक आय का अनुपात। यह फैसला करने के लिए कि कर्ज़ लेने वाले की आमदनी गिरवी करार के लायक है या नहीं, कर्ज़दाता हाउसिंग डीटीआई रेशो (घर की अदायगी की रकम को मासिक आय से घटाकर) और एक कुल डीटीआई रेशो (घर के भुगतान सहित सभी कर्जों के कुल भुगतान को मासिक आय से घटाकर) का इस्तेमाल करते हैं।
(डीड): एक कानूनी दस्तावेज जो जायदाद के मालिकाना हक को दिखाता है।
(डाउनपेमेंट): घर की खरीद की कीमत का वह हिस्सा जो खरीददार नकद रूप में देता है।
(ड्यू-ऑन-सेल क्लॉज): गिरवी करार या डीड का एक प्रावधान जिसके जरिए गिरवी-करार करने वाला यदि घर बेचता है तो कर्ज़दाता करार की बकाया रकम की फौरन वापसी की मांग कर सकता है।
(अर्नेस्ट मनी): एक रकम जो खरीददार द्वारा विक्रेता को दी जाती है। इससे यह दर्शाया जाता है कि खरीददार घर खरीदने के बारे में गंभीर है। बिक्री करार की कोई शर्त पूरी न होने की स्थिति में आमतौर पर अर्नेस्ट मनी खरीददार को लौटा दी जाती है।
(एनटाइटलमेंट): वेटरन्स अफेयर्स के होम लोन फायदे (अर्थात् वीए-गारंटिड होम लोन का अधिकार)। इसे योग्यता (एलिजिबिलिटी) भी कहा जाता है।
Equal Credit Opportunity Act (ECOA):
(इक्वल क्रेडिट ऑपरच्युनिटी एक्ट):एक सरकारी कानून जिसके जरिए कर्ज़दाताओं को नस्ल, रंग, धर्म, राष्ट्रीयता, आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति अथवा सार्वजनिक सहायता कार्यक्रमों से प्राप्त आमदनी के आधार पर भेदभाव के बिना समान रूप से कर्ज़ देना होता है।
(इक्विटी): घर की कीमत और घर पर ली गई गिरवी रकम का फर्क।
(एस्क्रो): क्लोजिंग से पहले एक निष्पक्ष तीसरी पार्टी द्वारा दस्तावेजों और धन को संभालना।
(एस्क्रो डिस्बर्समेंट): रीयल एस्टेट टैक्स, जोखिम बीमा, गिरवी बीमा और जायदाद संबंधी सभी खर्चों के भुगतान के लिए एस्क्रो फंड का इस्तेमाल।
(एस्क्रो पेमेंट): गिरवी कराने वाले की मासिक किश्त का एक हिस्सा जो टैक्सों, जोखिम बीमा और जायदाद के दूसरे खर्चों के भुगतान के लिए सेवाप्रदाता द्वारा रखा जाता है।
(एक्सक्लूसिव राइट टू सेल लिस्टिंग): एक करार जो एक निश्चित समय-सीमा में एक एजेंट को जायदाद बेचने का अधिकार प्रदान करता है।
(एक्सक्लूसिव एजेंसी लिस्टिंग): एक करार जो एक निश्चित समय-सीमा में एक ब्रोकर को जायदाद बेचने का अधिकार देता है लेकिन साथ ही जायदाद के मालिक को भी उसी अवधि में बिना कोई कमीशन दिए जायदाद बेचने की अनुमति देता है।
(फार्मर्स होम एडमिनिस्ट्रेशन): किसानों और दूसरे लोगों जिन्हें दूसरी जगहों से कर्ज़ नहीं मिलता, को कर्ज़ प्रदान करता है।
F (फेडरल हाउसिंग एडमिनिस्ट्रेशन): आवास और शहरी विकास विभाग का एक संभाग जिसका मुख्य काम निजी कर्ज़दाताओं द्वारा दिए गए गिरवी कर्ज़ों का बीमा करना है। एफएचए गिरवी-करार लिखने के तरीके भी निर्धारित करता है।
(फेडरल नेशनल मोर्टगेज़ एसोसिएशन): कांग्रेस द्वारा बनाया गया एक निजी कारपोरेशन जो परंपरागत आवासीय गिरवियों के साथ-साथ फेडरल हाउसिंग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा बीमित और वेटरन्स अफेयर्स से गारंटी प्राप्त मोर्टगेज़ों को खरीदता और बेचता है। यह संस्थान जो सात में से एक मोर्टगेज़ को धन प्रदान करता है, गिरवी-करार के लिए अधिक धन उपलब्ध कराता है और उसे अधिक वहनीय बनाता है। Fannie Mae और Freddie Mac गिरवी-करार बेचने वाली दूसरी मुख्य एजेंसियां हैं।
(एफएचए लोन): घर खरीदने वाले सभी पात्र खरीददारों के लिए खुला फेडरल हाउसिंग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा बीमित एक कर्ज़। हालांकि एफएचए के कर्ज़ों की सीमाएं होती हैं, वे इतने उदार होते हैं कि उनसे देश में कहीं भी सामान्य कीमत वाले घर खरीदे जा सकते हैं।
(एफएचए मोर्टगेज़ इंश्योरेंस): एफएचए के कर्ज़ का बीमा कराने के लिए क्लोजिंग के समय एक शुल्क (कर्ज़ की राशि का 2.25 प्रतिशत तक) देना पड़ता है। इसके साथ-साथ, एफएचए मोर्टगेज़ इंश्योरेंस के लिए मौजूदा कर्ज़ की राशि के 0.5 प्रतिशत तक एक वार्षिक शुल्क भी देना होता है जिसका भुगतान मासिक किश्तों में किया जाता है। नकद राशि जितनी कम होगी, उतने ही ज्यादा वर्षों तक यह शुल्क देना पड़ेगा।
(फर्म कमिटमेंट): किसी खास जायदाद और कर्ज़ लेने वाले के लिए गिरवी-करार का बीमा करने हेतु फेडरल हाउसिंग एडमिनिस्ट्रेशन का वादा। एक गिरवी कर्ज़ देने के लिए कर्ज़दाता का वादा।
(फर्स्ट मोर्टगेज़): किसी जायदाद को वापस प्राप्त करने का प्राथमिक अधिकार।
(फिक्स्ड इंस्टालमेंट): एक गिरवी कर्ज़ पर देय मासिक भुगतान जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों का भुगतान शामिल है।
(फिक्स्ड-रेट मोर्टगेज़): एक ऐसा कर्ज़ जिसमें ब्याज दर और मासिक भुगतान में बदलाव नहीं होता।
(फॉर सेल बाई ऑनर): बिक्री का कमीशन बचाने के लिए रियल्टर के बिना जायदाद का मालिक खुद अपना घर बेचता है। (फोरक्लोज़र): कर्ज़ लेने वाले के द्वारा गिरवी-करार की शर्तों को पूरा न करने पर कर्ज़दाता या विक्रेता द्वारा मोर्टगेज़ की गई जायदाद को बेचने के लिए एक कानूनी तरीका। इसे रीपज़ेशन ऑफ प्रॉपर्टी भी कहते हैं। (फेडरल होम लोन मोर्टगेज़ कारपोरेशन): एक अर्धसरकारी निजी स्वामित्व वाली एजेंसी जो बीमित बैंकिंग संस्थानों और एचयूडी से मान्यता प्राप्त मोर्टगेज़ बैंकरों से परंपरागत गिरवी-करार की खरीददारी करती है। Fannie Mae और Freddie Mac गिरवी-करार बेचने वाली दूसरी मुख्य एजेंसियां हैं।
(फुली एमोर्टाइज्ड एआरएम): मासिक भुगतान जो पूरी भुगतान अवधि में ब्याज की बढ़ी हुई दर पर बकाया का भुगतान करने के लिए काफी है, के साथ एक एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़।
(ग्रेज्यूएटिड-पेमेंट मोर्टगेज़):लचीले भुगतान वाली गिरवी की एक किस्म जिसमें एक निश्चित समय के लिए भुगतान की किश्तें बढ़ जाती हैं और उसके बाद बराबर हो जाती हैं। इस तरह के गिरवी-करार में नकारात्मक भुगतान रखे जाते हैं। (ग्रोइंग-इक्विटी मोर्टगेज़): स्थाई दर वाली एक मोर्टगेज़ जिसमें एक निश्चित समय अवधि में भुगतान बढ़ जाता है। मासिक किश्तों की बढ़ी हुई रकम को गिरवी की बकाया रकम को घटाने के लिए सीधे तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
(गारंटी): एक पार्टी द्वारा कर्ज़ चुकाने या मूल पार्टी द्वारा भुगतान करने या करार के अनुसार काम न करने पर दूसरी पार्टी के साथ किए गए करार की जिम्मेदारियों को पूरा करने का वादा।
(गारंटी मोर्टगेज़): एक ऐसा गिरवी करार जिसमें किसी तीसरी पार्टी की गारंटी होती है।
(हैजर्ड इंश्योरेंस): एक किस्म का बीमा जिसमें बीमा कंपनी बीमा कराने वाले को आग, तूफान और इसी प्रकार के दूसरे नुकसानों से बचाती है।
(होमओनर्स वारंटी): एक पॉलिसी जिसमें एक निश्चित समय के लिए नए खरीदे गए घर की कुछ मरम्मतें (जैसे नलसाजी या हीटिंग) शामिल होती हैं।
Housing Expenses-to-Income Ratio:
(हाउसिंग एक्सपेंसिज-टू-इनकम रेशो): प्रतिशत में बताया गया एक अनुपात जिसे कर्ज़ लेने वाले के घर के खर्चों को उसकी कुल मासिक आमदनी में से भाग करके निकाला जाता है।
(एचयूडी-1 स्टेटमेंट): एक दस्तावेज जिसमें क्लोजिंग के समय भुगतान की जाने वाली रकम का मदवार ब्यौरा होता है। इस स्टेटमेंट में रीयल एस्टेट कमीशन, कर्ज़ की फीस, पाइंट्स और शुरूआती एस्क्रो रकम शामिल होती है। एक मानकीकृत नंबरिंग सिस्टम में एक अलग नंबर होता है जो स्टेटमेंट की हरेक मद को दर्शाता है। एचयूडी-1 स्टेटमेंट के नीचे कुल जोड़ क्लोजिंग के समय विक्रेता की कुल आमदनी और खरीददार के कुल भुगतान को दर्शाता है।
(इम्पाउंड एकाउंट): कर्ज़दार के सम्पत्ति कर और बीमा भुगतानों को प्राप्त करने के लिए कर्ज़दाता द्वारा बनाया गया एक एकाउंट। इम्पाउंड एकाउंट की आमतौर पर 10 प्रतिशत या कम नकद भुगतानों वाली मोर्टगेज़ पर जरूरत होती है।
(इन्डेक्स): एक प्रकाशित ब्याज दर जिसके विरुद्ध कर्ज़दाता एक एडजस्टेबल रेट मोर्टगेज़ पर मौजूदा ब्याज दर और दूसरे निवेशों (जैसे एक-, तीन- और पांच-वर्षीय अमेरिकन ट्रेज़री सिक्यूरिटी यील्ड्स, बचतों और कर्ज़ संस्थानों द्वारा बंद कर्ज़ों पर औसत ब्याज दर, और बचतों तथा कर्जों द्वारा प्राप्त की गई फंड्स की मासिक औसत लागत) के अंतर को मापता है। तब इसे एक एडजस्टेबल मोर्टगेज़ पर ब्याज दर को कम या ज्यादा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
rate (इन्डेक्स्ड रेट): प्रकाशित इन्डेक्स और मार्जिन का जोड़। उदाहरण के लिए, यदि इन्डेक्स 9 प्रतिशत और मार्जिन 2.75 प्रतिशत था तो इन्डेक्स्ड रेट 11.75 प्रतिशत होगा। आमतौर पर कर्ज़दाता एक एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ पर पहले साल में इन्डेक्स्ड रेट से कम दर लेते हैं।
(इनीशियल इंटरेस्ट रेट): इसका अर्थ क्लोजिंग के समय मोर्टगेज़ की मूल ब्याज दर से है। एक एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ के लिए यह दर बदलती रहती है। इसे "स्टार्ट रेट" या "टीज़र" भी कहते हैं।
(इंस्टालमेंट): कर्ज़दाता को नियमित आवधिक भुगतान जिसे करने के लिए कर्ज़दार सहमत होता है।
(इंश्योर्ड मोर्टगेज़): एक मोर्टगेज़ जो फेडरल हाउसिंग एडमिनिस्ट्रेशन या प्राइवेट मोर्टगेज़ इंश्योरेंस द्वारा बीमित होती है।
(इंटरेस्ट): कर्ज़ लेने के लिए वसूला गया शुल्क।
(इंटरेस्ट एक्रुअल रेट): प्रतिशत दर जिस पर मोर्टगेज़ पर ब्याज लिया जाएगा। ज्यादातर मामलों में, इसी दर पर मासिक भुगतानों की गणना भी की जाती है।
(इंटरेस्ट रेट बाइडाउन प्लान): एक व्यवस्था जो जायदाद बेचने वाले को एक एकाउंट में पैसा जमा कराने की इजाजत देता है। बाद में इस रकम को मोर्टगेज़ के शुरूआती वर्षों में गिरवी कराने वाले के मासिक भुगतानों को घटाने के लिए निकाला जाता है।
(इंटरेस्ट रेट सीलिंग): मोर्टगेज़ दस्तावेज में लिखे अनुसार एक एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ के लिए अधिकतम ब्याज दर।
(इंटरेस्ट रेट फ्लोर): मोर्टगेज़ दस्तावेज में लिखे अनुसार एक एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ के लिए न्यूनतम ब्याज दर।
(इंटरिम फायनेंसिंग): किसी बिल्डिंग या प्रोजेक्ट के पूरा होने के दौरान निर्माण के लिए दिया गया कर्ज़। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद आमतौर पर इस कर्ज़ को स्थाई कर्ज़ में बदल दिया जाता है।
(इन्वेस्टर): कर्ज़दाता के लिए धन प्राप्त करने एक स्रोत।
(लीज़-परचेज मोर्टगेज लोन): कर्ज़ लेने का एक वैकल्पिक तरीका जिसमें कम या साधारण आमदनी वाले लोगों को खरीद के विकल्प के साथ घर को लीज़ पर ले सकते हैं। प्रत्येक महीने के किराए में पहली मोर्टगेज़ पर मूलधन, ब्याज, टैक्स और बीमा के भुगतान के साथ-साथ एक अतिरिक्त रकम शामिल होती है जो नकद भुगतान के लिए एक बचत खाते में रखी जाती है।
(देनदारियां): एक व्यक्ति की वित्तीय देनदारियां। देनदारियों में लंबी और छोटी अवधि के कर्ज़ शामिल होते हैं।
(लियन): एक कर्ज़ या देनदारी के भुगतान या संतुष्टि के लिए जायदाद के किसी हिस्से पर दावेदारी।
(लाइफटाइम पेमेंट कैप): एक एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ के लिए, रकम पर यह बंदिश कि मोर्टगेज़ की समय-सीमा के दौरान भुगतान बढ़ या घट सकते हैं।
(लाइफटाइम रेट कैप): एक एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ के लिए, रकम पर यह बंदिश कि कर्ज़ की समय-सीमा के दौरान ब्याज दर बढ़ या घट सकती है।
(लिस्टिंग): एक लिस्टिंग एजेंट द्वारा बेचने के लिए रखी हुई जायदाद।
(लोन): उधार ली गई रकम (मूलधन) जिसका आमतौर पर ब्याज सहित भुगतान किया जाता है।
(लोन-टू-वैल्यू रेशो): एक घर पर उधार ली गई रकम और घर की कीमत का अनुपात। उदाहरण के लिए, $ 90,000 की मोर्टगेज़ के साथ $ 100,000 के घर की एलटीवी रेशो 90 प्रतिशत होगी।
(लॉक): कर्ज़दाता की गारंटी कि बताई गई मोर्टगेज़ दर आवेदन के दिन से लेकर कुछ दिनों तक अच्छी रहेगी।
(मार्जिन): वह रकम जिसे कर्ज़दाता समायोजित ब्याज दर स्थापित करने के लिए एक एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ पर इन्डेक्स में जोड़ता है।
(मार्केट वैल्यू): किसी जायदाद की सबसे ऊंची कीमत जो एक खरीददार दे सकता है और सबसे कम कीमत जो एक विक्रेता स्वीकार कर सकता है। किसी जायदाद की बाज़ार कीमत बेचते वक्त की वास्तविक कीमत से भिन्न हो सकती है।
(मैच्योरिटी): वह तारीख जब कर्ज़ का बकाया मूलधन देय हो जाता है।
(मीडिएशन): विवादों को सुलझाने का तरीका। मीडिएशन में, विवाद के पक्षकारों की एक निष्पक्ष अन्य पक्षकार द्वारा सहायता की जाती है जिसे मीडिएटर कहते हैं। मीडिएटर को यह अधिकार नहीं होता कि वह समझौते या फैसले को पक्षकारों पर जबरदस्ती थोप सके। फिर भी मीडिएटर पक्षकारों के विवाद को आपस में स्वीकार्य समझौते तक पहुंचाने के उद्देश्य से पक्षकारों को बातचीत और सौदेबाजी करने में मदद करता है।
(एमआईपी - मोर्टगेज़ इंश्योरेंस प्रीमियम): कर्ज़दार की चूक के कारण कर्ज़दाता को होने वाले नुकसान के विरुद्ध एफएचए की ओर से बीमा।
(मंथली फिक्स्ड इंस्टालमेंट): कुल मासिक किश्त का वह हिस्सा जो मूलधन और ब्याज का भुगतान करने के लिए इस्तेमाल होता है। यदि किसी मोर्टगेज़ का भुगतान नहीं होता, तो स्थाई मासिक किश्त में मूलधन को घटाने के लिए कोई रकम शामिल नहीं होती और यह पूरे ब्याज को भी कवर नहीं करता। इसलिए बकाया कर्ज़ घटने की बजाय बढ़ जाता है।
(मोर्टगेज़): एक कानूनी दस्तावेज जो कर्ज़ के भुगतान के लिए जमानत के तौर पर कर्ज़दाता के पास जायदाद को गिरवी रखता है।
(मोर्टगेज़ बैंकर): एक कंपनी जो सेकेंडरी मोर्टगेज़ बाज़ार (अर्थात् Fannie Mae और Freddie Mac ) में बिक्री के लिए मोर्टगेज़ की शुरूआत करती है।
(मोर्टगेज़ ब्रोकर): एक व्यक्ति या कंपनी जो कर्ज़दार और कर्ज़दाता के बीच मोर्टगेज़ कराने की व्यवस्था करता है।
(मोर्टगेज़ी): कर्ज़दाता।
(मोर्टगेज़ इंश्योरेंस): जब नकद भुगतान 20 प्रतिशत से कम हो तो मोर्टगेज़ का बीमा कराने के लिए दी गई रकम।
(मोर्टगेज़ लाइफ इंश्योरेंस): पूरी अवधि का एक प्रकार का जीवन बीमा जो खास तौर पर इसलिए होता है कि यदि पॉलिसी चालू रहने के दौरान कर्ज़दार की मृत्यु हो जाए तो कर्ज़ का भुगतान अपने-आप बीमे की रकम से कर दिया जाता है।
(मोर्टगेज़ इंटरेस्ट डिडक्शन): फेडरल और स्टेट आयकर के लिए घर के कर्ज़ पर दिए गए ब्याज को काटने के लिए मोर्टगेज़ पर कर्ज़ लेने वाले की पात्रता।
(मोर्टगेज़ी): कर्ज़दार या घर का मालिक।
(मल्टीपल लिस्टिंग्स सर्विस): यह सेवा एक क्षेत्र में उपलब्ध सभी घरों को एक डायरेक्टरी या डाटाबेस में इकट्ठा करती है। इसमें वे जायदाद शामिल नहीं होतीं जो घर के मालिक द्वारा खुद बेची जा रही हों।
(नेगेटिव एमोर्टाइजेशन): यह तब होता है जब मासिक किश्तें इतनी बड़ी नहीं होती कि कर्ज़ पर देय सभी ब्याज का भुगतान कर सकें। जो ब्याज चुकाया नहीं गया है उसे बकाया कर्ज़ में जोड़ दिया जाता है। इसका सबसे बड़ा खतरा यह है कि घर खरीदने वाले को कर्ज़ की मूल रकम से ज्यादा के कर्ज़ का भुगतान करना पड़ता है।
(नेट इफेक्टिव इनकम): फेडरल आयकर को घटाने के बाद कर्ज़ लेने वाले की कुल आमदनी।
(नेट लिस्टिंग): एक लिस्टिंग करार जिसमें मालिक द्वारा तय की गई कीमत पर ब्रोकर के कमीशन की रकम शामिल होती है। यदि कुल कीमत नहीं मिलती तो कमीशन भी नहीं दिया जाता। (नॉन-एजम्पशन क्लॉज): एक गिरवी करार में एक कथन जो कर्ज़दाता की पूर्व अनुमति के बिना मोर्टगेज़ की एजम्पशन को रोकता है।
(नोट): एक कानूनी दस्तावेज जो कर्ज़दार को एक निश्चित समय-सीमा में तय किए गए ब्याज पर गिरवी कर्ज़ को लौटाने का जिम्मेदार बनाता है।
(वन-ईयर एडजस्टेबल): ऐसी मोर्टगेज़ जिसकी वार्षिक ब्याज दर हर वर्ष बदलती रहती है। यह दर आमतौर पर एक प्रकाशित इन्डेक्स और कर्ज़दाता द्वारा चुने गए एक खास मार्जिन पर आधारित होती है।
(ओपन लिस्टिंग): एक ही समय में एक से ज्यादा एजेंटों द्वारा बेची जाने वाली जायदाद।
(ओरिजिनेशन फी): मोर्टगेज करने के लिए कर्ज़दाता द्वारा ली जाने वाली फीस।
(ओनर फायनेंसिंग): एक जायदाद की खरीद-फरोख्त जिसमें जायदाद को बेचने वाली पार्टी ही पूरी या कुछ रकम देती है।
(पेमेंट चेंज डेट): वह तारीख जब एक एडजस्टेबल-रेट मोर्टगेज़ या एक ग्रेज्यूएटिड-पेमेंट मोर्टगेज़ पर नई मासिक किश्तें शुरू होती हैं।
(पीरियोडिक पेमेंट कैप): रकम पर एक सीमा कि किसी एक एडजस्टमेंट अवधि के दौरान भुगतान बढ़ या घट सकते हैं।
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(पीरियोडिक रेट कैप): रकम पर एक सीमा कि किसी एक एडजस्टमेंट अवधि के दौरान चाहे इन्डेक्स कितना भी ज्यादा या कम क्यों न हो, ब्याज दर बढ़ या घट सकती है।
(परमानेंट लोन): लंबी अवधि का एक मोर्टगेज़, आमतौर पर 10 वर्ष या अधिक के लिए। इसे "एंड लोन" भी कहा जाता है।
(पी आई टी आई): प्रिंसीपल (मूलधन), इंटरेस्ट (ब्याज), टैक्स (कर) और इंश्योरेंस (बीमा) - एक मासिक मोर्टगेज़ भुगतान के लिए प्राथमिक चीजें।
(प्लेज्ड-एकाउंट मोर्टगेज़): रकम को एक गारंटीशुदा बचत खाते में रखा जाता है और इस रकम तथा इस पर मिले ब्याज से धीरे-धीरे मोर्टगेज़ भुगतानों को किया जाता है।
(प्वाइंट्स): एक प्वाइंट मोर्टगेज़ रकम के 1 प्रतिशत के बराबर होता है। मोर्टगेज़ पर कर्ज़दाता के लाभ को बढ़ाने के लिए कर्ज़दाताओं द्वारा प्वाइंट्स वसूले जाते हैं। कर्ज़दाता शून्य से लेकर दो प्वाइंट तक कहीं भी चार्ज कर सकते हैं। कर्ज़ प्वाइंट पर टैक्स काटा जाता है।
(पावर ऑफ अटार्नी): एक कानूनी दस्तावेज जो एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की तरु से काम करने के लिए अधिकार देता है।
(प्री-एप्रूवल): कर्ज़ के लिए आपके आवेदन से पहले इस बात का फैसला करने की प्रक्रिया कि आपके कितने कर्ज़ के लायक हैं।
(प्रीपेड एक्सपेंसेज): एक एस्क्रो एकाउंट खोलने या विक्रेता के मौजूदा एस्क्रो एकाउंट का समायोजन करने के लिए इसकी जरूरत होती है। इसमें टैक्स, जोखिम बीमा, प्राइवेट मोर्टगेज़ बीमा और विशेष मूल्यांकनों को शामिल किया जा सकता है।
(प्रीपेमेंट): मोर्टगेज़ का एक खास अधिकार जो कर्ज़दार को देय तारीख से पहले भुगतान करने की इजाजत देता है।
(प्रीपेमेंट पैनल्टी): कर्ज़ की समय से पहले वापसी पर ली गई रकम। बहुत से राज्यों में किसी रूप में प्रीपेमेंट पैनल्टी की इजाजत है (लेकिन अनिवार्य रूप से थोपी हुई नहीं)।
(प्राइमरी मोर्टगेज़ मार्केट): सेविंग्स-एंड-लोन एसोसिएशन्स, वाणिज्यिक बैंकों और मोर्टगेज़ कंपनियों जैसे कर्ज़दाता जो कर्ज़दारों को सीधे मोर्टगेज़ कर्ज़ देते हैं। ये कर्ज़दाता कभी-कभी अपनी मोर्टगेज़ों को सेकेंडरी मोर्टगेज़ मार्केटों में भी बेचते हैं।
(प्रिंसीपल): लिए गए अथवा लिए जाने वाले कर्ज़ की रकम।
(प्राइवेट मोर्टगेज़ इंश्योरेंस):प्राइवेट बीमाकर्ताओं द्वारा जारी किया गया बीमा जो कम नकदी (जैसे 20 प्रतिशत से कम) वाले मोर्टगेज़ पर कर्ज़दार की चूक से होने वाले नुकसान से र्ज़दाताओं को बचाता है।
: (क्वालिफाइंग रेशोज़): गणना जिसका उपयोग इस बात का फैसला करने के लिए किया जाता है कि क्या कर्ज़ लेने वाला मोर्टगेज़ के काबिल है। इनमें दो अलग-अलग तरह की गणनाएं होती हैं: आमदनी अनुपात के रूप में घर संबंधी खर्च और आमदनी अनुपात के रूप में कर्ज़ संबंधी कुल देनदारियां।
(रेट लॉक): कर्ज़दाता द्वारा कर्ज़दार अथवा मोर्टगेज़ करने वाले अन्य व्यक्ति को दिया गया वचन जिसमें एक निश्चित समय-सीमा के लिए एक निश्चित ब्याज दर और कर्ज़दाता की लागत की गारंटी होती है।
(रीयल एस्टेट सैटलमेंट प्रोसीज़र एक्ट): उपभोक्ता की रक्षा करने वाला एक कानून जिसमें कर्ज़दाता को क्लोजिंग लागत के बारे में कर्ज़दार को अग्रिम नोटिस देने की जरूरत होती है। यह एक फेडरल कानून है जो अन्य बातों के साथ-साथ, उपभोक्ता को आवेदन करने के बाद और पहले अथवा सैटलमेंट के समय ज्ञात अथवा अनुमानित सैटलमेंट लागत पर जानकारी को परखने की अनुमति देता है। इस कानून के मुताबिक कर्ज़दाता को केवल आवेदन के बाद ही सूचना देने की जरूरत होती है।
(रीयल्टर): एक रीयल एस्टेट ब्रोकर या एजेंट जो स्थानीय REALTOR S ® एसोसिएशन, राज्य की REALTORS® एसोसिएशन और NATIONAL ASSOCIATION OF REALTORS® ( www.onerealtorplace.com के लिए लिंक) के सदस्य के रूप में उच्च पेशेवर मानकों और नैतिकता की सख्त शर्तों का पालन करता है।
(रीसिज़न): करार को खत्म करना जिससे सभी पक्षकार वापस उसी स्थिति में पहुंच जाते हैं जो करार करने से पहले थी। मोर्टगेज़ पर कर्ज़ की कुछ स्थितियों में जिनमें जमानत के रूप में घर में कुछ इक्विटी शामिल होती है, करार खत्म करने के लिए कानून घर के मालिक को तीन दिन का समय देता है।
(रेकॉर्डिंग फीस): स्थानीय प्राधिकरणों में घर की बिक्री को दर्ज़ कराने और इस तरह इसे सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने के लिए कर्ज़दाता को दी गई रकम।
(रीफाइनेंस): एक जायदाद जिस पर पहले ही कर्ज़ लिया गया है, पर एक नया मोर्टगेज़ कर्ज़ प्राप्त करना। आमतौर पर ऐसा जायदाद पर मौजूदा कर्जों के बदले किया जाता है। (रीनेगोशिएबल रेट मोर्टगेज़): एक ऐसा कर्ज़ जिसमें ब्याज दर को समय-समय पर समायोजित किया जाता है।
(रिवर्स एन्यूटी मोर्टगेज़):एक प्रकार की मोर्टगेज़ जिसमें कर्ज़दाता घर में कर्ज़दार के हिस्से को जमानत के तौर पर इस्तेमाल करते हुए और कर्ज़ की वापसी के लिए समय-समय पर कर्ज़दार को भुगतान करता रहता है। (रिवॉल्विंग लाएबिलिटी): कर्ज़ की एक व्यवस्था जैसे क्रेडिट कार्ड, जिसमें उपभोक्ता सामान और सुविधाएं खरीदते समय पहले से स्वीकृत कर्ज़ पर उधार ले सकता है।
(सैटिस्फैक्शन ऑफ मोर्टगेज़): मोर्टगेज़ कर्ज़ का पूरा भुगतान हो जाने पर मोर्टगेज़ करने वाले के द्वारा जारी किया गया दस्तावेज़। इसे "रिलीज़ ऑफ मोर्टगेज़" भी कहा जाता है।
(सेकेंड मोर्टगेज़): एक मोर्टगेज़ के बाद बनाई गई दूसरी मोर्टगेज़। यह पहली मोर्टगेज़ के अधीन होती है।
(सेकेंड्री मोर्टगेज़ मार्केट): वह स्थान जहां प्राइमरी मोर्टगेज़ के कर्ज़दाता मोर्टगेज़ को बेचते हैं। इससे अधिक कर्ज़े देने के लिए वे और अधिक रकम जुटाते हैं। इससे कर्ज़दाताओं को लिक्विडीटी प्राप्त होती है।
(सिक्युरिटी): कर्ज़ के लिए जमानत के तौर पर गिरवी रखी गई जायदाद।
S (सेलर कैरी-बैक): एक करार जिसमें विक्रेता प्राय: एक एज्यूमेबल मोर्टगेज़ के साथ धन प्रदान करता है। (सेलर फाइनेंसिंग):एक वित्तीय करार जिसमें विक्रेता के घर को खरीदने के लिए विक्रेता खरीददार को रकम का कुछ (अथवा पूरा) हिस्सा प्रदान करता है।
(सर्विसर): एक संस्था जो कर्ज़दारों से मूलधन और ब्याज का भुगतान इकट्ठा करती है और कर्ज़दार के एस्क्रो एकाउंट की देखभाल करती है। ये सर्विसर आमतौर पर उन मोर्टगेज़ों पर सेवाएं प्रदान करते हैं जो एक निवेशक द्वारा सेकेंड्री मोर्टगेट मार्केट से खरीदी गई हैं।
(सर्विसिंग): एक कर्ज़ को सही स्थिति जैसे भुगतान प्राप्त करना, करों और बीमा का भुगतान, जायदाद का निरीक्षण आदि, में बनाए रखने के लिए कर्ज़दाता द्वारा उठाने जाने वाले सभी कदम और कार्य। शेयर्ड-एप्रिसिएशन मोर्टगेज़): एक मोर्टगेज़ जिसमें जायदाद की कीमत में भविष्य में होने वाली वृद्धि के एक हिस्से को प्राप्त करने के एवज़ में कर्ज़दाता (या कोई अन्य निवेशक जैसे कोई पारिवारिक सदस्य या दूसरा साझेदार) बाज़ार से कम ब्याज दर पर कर्ज़ देता है। यह ऐसी मोर्टगेज़ पर भी लागू हो सकता है जहां कर्ज़दार कीमत में बढ़ोत्तरी के हिस्से के बदले किसी अन्य पार्टी के साथ मूलधन और ब्याज के मासिक भुगतान में हिस्सा बंटाता है।
(सिंपल इंटरेस्ट): ऐसा ब्याज जो केवल बकाया मूलधन पर लगता है।
(स्टैंडर्ड पेमेंट कैलकुलेशन): मौजूदा ब्याज दर पर मोर्टगेज़ की बकाया अवधि में बराबर किश्तों में मोर्टगेज़ की बकाया रकम के भुगतान के लिए जरूरी मासिक भुगतान का निर्धारण करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका।
(स्टेप-रेट मोर्टगेज़): एक मोर्टगेज़ जिसमें एक निश्चित समय-सीमा (जैसे सात वर्ष) के अनुसार ब्याज दर में वृद्धि की अनुमति होती है और इसके परिणामस्वरूप भुगतानों में बढ़ोत्तरी हो जाती है। निश्चित अवधि की समाप्ति पर, कर्ज़ की बाकी अवधि के लिए दर और भुगतान स्थिर रहेंगे।
(सर्वे): एक पंजीकृत भूमि सर्वेक्षक द्वारा तैयार किया गया जमीन का माप जिसमें ज्ञात बिंदुओं के संदर्भ में जमीन का स्थान, इसका आकार और किन्हीं बिल्डिंगों का स्थान और आकार दिखाया जाता है।
(स्वीट इक्विटी): खरीदी जाने वाली जायदाद पर काम करते हुए एक खरीददार द्वारा बनाई गई इक्विटी।
(थर्ड-पार्टी ओरिजिनेशन): जब एक कर्ज़दाता मोर्टगेज़ को पूरी तरह या आंशिक रूप से ओरिजिनेट, प्रक्रिया, मूल्यांकन, क्लोज़, धन उपलब्ध कराने या पैकेज़ के लिए किसी अन्य पक्षकार का इस्तेमाल करता है यह सेकेंड्री मोर्टगेज़ मार्केट को सुपुर्द करने की योजना बनाता है।
(टाइटल): जायदाद के मालिकाना हक से संबंधित एक कानूनी अवधारणा।
(टाइटल इंश्योरेंस): जायदाद के मालिकाना हक के संबंध में हुए विवादों से खरीददार और कर्ज़दाता को बचाने के लिए बीमा। (टाइटल सर्च): जायदाद के कानूनी मालिकाना हक को तय करने के लिए सरकारी रिकॉर्ड की जांच करना। रिकॉर्डों को आमतौर पर काउंटी रिकॉर्डर्स ऑफिस द्वारा दर्ज़ किया जाता है। यह खोजबीन का काम आमतौर पर कंप्यूटराइज्ड रिकॉर्डों का इस्तेमाल करके एक टाइटल कंपनी द्वारा किया जाता है।
(टोटल एक्सपेंस रेशो): घर संबंधी मासिक खर्चों , अन्य मासिक कर्जों सहित कुल मासिक आमदनी के प्रतिशत के रूप में कुल देनदारियां।
(ट्रुथ इन लैंडिंग एक्ट): एक फेडरल कानून जिसमें घर खरीदने वालों को कर्ज़ के लिए आवेदन करने के बाद वार्षिक प्रतिशत दर बताने की आवश्यकता होती है। इसे "रेग्यूलेशन ज़ेड" के नाम से भी जाना जाता है।
(टू-स्टेप मोर्टगेज़): एक मोर्टगेज़ जिसमें कर्ज़दार निश्चित वर्षों (आमतौर पर सात या 10) के लिए बाज़ार से कम दर पर ब्याज दर प्राप्त करता है, और उसके बाद उस सयम की बाज़ार स्थितियों के अनुसार एक नई ब्याज दर (एक निश्चित सीमा के भीतर) प्राप्त करता है। कभी-कभी कर्ज़दाता को यह विकल्प होता है कि वह सात या 10 वर्षों की अवधि की समाप्ति पर 30 दिनों का नोटिस देकर कर्ज़ को वापस ले सकता है।
(अंडरराइटिंग): यह निर्धारित करने के लिए कर्ज़ के आवेदन का मूल्यांकन करने की प्रक्रिया कि यह कर्ज़दाता के मानकों को पूरा करता है या नहीं।
(यूजरी): कानून द्वारा तय की गई कानूनी दर से ज्यादा वसूला गया ब्याज।
(वीए लोन): डिपार्टमेंट ऑफ वेटरन्स अफेयर्स द्वारा गारंटीयुक्त लंबी अवधि, कम या बिना नकद भुगतान वाला एक कर्ज़। यह केवल सैनिक सेवा या अन्य पात्रता वाले लोगों तक सीमित है।
(वीए मोर्टगेज़ फंडिंग फी): वीए के समर्थन वाले कर्ज़ पर भुगतान किया गया 1.5 प्रतिशत (नकद भुगतान की रकम पर निर्भर करते हुए) का एक प्रीमियम। बिना किसी नकद भुगतान वाली $ 75,000 की स्थाई-दर मोर्टगेज़ पर यह $ 1,406 होगा चाहे इसे क्लोजिंग के समय दिया गया हो अथवा कर्ज़ की रकम में जोड़ा गया हो।
(वेरीफिकेशन ऑफ डिपोजिट):कर्ज़दार के वित्तीय खातों की स्थिति और बकाया की पुष्टि करने वाला वित्तीय संस्थान द्वारा हस्ताक्षरित एक दस्तावेज।
(वेयरहाउस फी): कुछ मोर्टगेज़ फर्मों को कर्जों जिन्हें बाद में सेकेंड्री मोर्टगेज़ मार्केटों या निवेशकों को बेचा जाना है, के लिए छोटी अवधि की रकमों का कर्ज़ लेना पड़ता है। जब मोर्टगेज़ कर्जों के मुकाबले छोटी अवधि के कर्जों पर ब्याज की शीर्ष दर ज्यादा होती है तो मोर्टगेज़ फर्मों को नुकसान उठाना पड़ता है जिसकी भरपाई वे वेयरहाउस फीस के जरिए करते हैं।
(रैपएराउंड मोर्टगेज़): यह तब होती है जब एक मौजूदा एज्यूमेबल कर्ज़ को एक नई कर्ज़ के साथ मिला दिया जाता है, इसमें ब्याज दर पुरानी दर और मौजूदा बाज़ार दर के बीच में होती है। इसका भुगतान दूसरे कर्ज़दाता या घर के पुराने मालिक को किया जाता है जो अतिरिक्त रकम का भुगतान लेने के बाद इसे पहले कर्ज़दाता को भेज देता है।
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"यह दस्तावेज़ SAREAA द्वारा कैलिफोर्निया एसोसिएशन ऑफ रियल्टर्स (r) (C.A.R) के स्वामित्व वाली बौद्धिक संपदा का इस्तेमाल करते हुए, C.A.R. द्वारा प्रदान की गई अनुमति के अंतर्गत सृजित किया गया है। C.A.R. ने इस दस्तावेज़ के अनूदित संस्करण की समीक्षा या अनुमोदन नहीं किया है और वे इसका पृष्ठांकन /समर्थन
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