South Asian Housing Assistance Resource Agency of America  
Join / Become a Member  
मुखपृष्ठ
हमारे बारे में
स्रोत/संसाधन
घर खरीदना
घर बेचना
मोर्टगेज़ कर्ज़
क्रेडिट स्कोर
एस्क्रो/मालिकाना हक
उपभोक्ता लिंक
प्रायोजित लिंक
शब्दावली
हमसे संपर्क करें
हमारे सहयोगी
 
English Hindi Punjabi Gujarati Tamil Telugu Bangla Urdu
 
  प्यारा घर - अपने घर का मालिक बनने के लिए आपकी यात्रा pages 1 2 3  
 


एस्क्रो और टाइटल इंश्योरेंस क्या है?

एस्क्रो वो वक्त है जिसके दौरान ज़ायदाद के बेचने से संबंधित सभी रकमों और काग़ज़ातों की जांच-पड़ताल की जाती है। यही वो वक्त है जब टाइटल कंपनी का काम शुरू होता है जो खरीदार और बेचने वाले के लिए एक स्वतंत्र तीसरी पार्टी के तौर पर काम करती है। टाइटल कंपनी दोनों पार्टियों की बात सुनती है, रकम दिलाने के लिए ज़िम्मेदारी लेती है, सारी काग़जी कार्रवाई को निपटाती है, और उस डीड को रेकॉर्ड करवाती है जिससे घर आपका यानी खरीदार का हो जाता है।

सौदे में शामिल सभी पार्टियों की हिफ़ाजत एस्क्रो करता है। उदाहरण के लिए, जब बेचने वाला इस सबूत की पड़ताल करता है कि खरीदार की नीयत साफ़ है, तो पैसा जमा कराकर खरीदार के पैसे की हिफ़ाजत की जाती है। टाइटल कंपनी सौदे के लिए ज़रूरी सभी टैक्स निर्देशों और काग़जातों को संभालती है, हरेक पार्टी को सही पैसे का भुगतान कराती है और नई डीड की रेकॉर्डिंग जैसे सभी विवरणों को संभालती है।

इंश्योरेंस, एक इंश्योरेंस पॉलिसी है जो खरीदार को उन जोख़िमों से बचाती है जो टाइटल सर्च के दौरान सामने न आए हों। "छुपी हुई कमियों" के नाम से भी जाने जाने वाले ये जोख़िम हो सकता है बाद में कई सालों तक सामने न आएं। कुछ उदाहरण हैं: ऐसे वारिस जिनके बारे में पहले न बताया गया हो, असली मालिक की जगह नकली आदमी, डीड पर जाली दस्तख़त या मंदबुद्धि, अवयस्क या अकेले लेकिन वास्तव में शादीशुदा लोगों द्वारा डीड और गिरवी पर दस्तख़त। इस तरह की छुपी हुई कमियों के होने पर भी, टाइटल कंपनी आपकी और आपकी ज़ायदाद की हिफ़ाजत करेगी।

क्लोज़िग लागतें क्या है और क्या मुझे उनका भुगतान करना है?

दो तरह के क्लोज़िंग लागत खर्चे हैं: नॉन-रिकरिंग (जिनका आपको केवल एक बार भुगतान करना है) और रिकरिंग (जिनका अलग-अलग वक्त पर भुगतान करना है)। नॉन-रिकरिंग लागतों में ये फीस शामिल हैं लेकिन इनके अलावा और भी हो सकते हैं: मूल्यांकन, कर्ज़ रिपोर्ट, पॉइंट्स या कर्ज़ की शुरूआत, ज़ायदाद की पड़ताल, टाइटल इंश्योरेंस और एस्क्रो, काग़जात तैयार करना, टैक्स सर्विस, नोटरी, रेकॉर्डिंग, कूरियर, वायर ट्रांस्फर और ट्रांस्फर स्टाम्प (काउंटी और सिटी ट्रांस्फर टैक्स)।

रिकरिंग लागतों और प्रो-रेशन्स में ये फीस शामिल हैं लेकिन इनके अलावा और भी हो सकते हैं: ज़ायदाद पर जोख़िम का इंश्योरेंस, प्रॉपर्टी टैक्स, ब्याज प्रो-रेशन, पहले महीने का प्रो-रेटिड भुगतान और यदि लागू है तो पीएमआई (प्राइवेट मोर्टगेज़ इंश्योरेंस)। इनमें से बहुत सी लागतों को उस काउंटी जहां आपकी ज़ायदाद है, की परंपराओं के अनुसार खरीदार और बेचने वाले के बीच बांट दिया जाता है।

आपका कर्ज़दाता और रीयल एस्टेट एजेंट/ब्रोकर अनुमानित क्लोज़िंग लागतों का एक "गुड फेथ़ एस्टीमेट" देगा। वास्तविक लागतें एस्क्रो होल्डर द्वारा कर्ज़दाता के निर्देशों पर तैयार की जाएंगी और दस्तख़त करते वक्त बताई जाएंगी।

बधाई । आपने पहला कदम उठा लिया है। इस सफ़र में 19 कदम और हैं :

1. अपना रीयल एस्टेट एजेंट चुनना।

2. अपने कर्ज़दाता को चुनना (अलग-अलग तरह के कर्जों और पूर्व-योग्यता के बारे में जानिए)

3. अपने घर का चुनाव करना (घर की किस्म, कीमत और जगह का फैसला करना)

4. पेशकश (ज़ायदाद मिल जाने के बाद अपने रीयल एस्टेट एजेंट के जरिए एक लिखित पेशकश कीजिए)

5. एस्क्रो कार्रवाई (बेचने वाले से करार हो जाने पर, शुरूआती गुड फ़ेथ डिपोजिट एक एस्क्रो नुमाइंदे को दिया जाता है। एस्क्रो कार्रवाई शुरू हो जाती है)।

6. गिरवी के लिए कर्ज़ (उपयुक्त फॉर्म भरकर गिरवी के लिए कर्ज़ के वास्ते अनुरोध किया जाता है)

7. शुरूआती टाइटल रिपोर्ट (की पड़ताल करके मंज़ूर की जाती है)

8. इंस्पेक्शन और डिस्क्लोजर (करार में बताए गए वक्त के दौरान ज़ायदाद का इंस्पेक्शन किया जाता है और बेचने वाले ने ज़ायदाद के बारे में जो भी बातें बताई हैं, उनकी पड़ताल की जाती है)

9. मूल्यांकन (ज़ायदाद की कीमत कर्ज़दाता द्वारा तय की जाती है)

10.कर्ज़ की मंज़ूरी (कर्ज़ देने वाला एस्क्रो एजेंट से संपर्क करता है)

11.छुपी हुई कमियों के लिए इंश्योरेंस (खरीदार एस्क्रो एजेंट को उस कंपनी कानाम बताता है जो पॉलिसी देगी)

12.शर्तें (एस्क्रो एजेंट पक्का करता है कि शर्तें पूरी हों)

13. ज़ायदाद का आखिरी दौरा (सौदा पूरा करने से पहले रीयल एस्टेट एजेंट के साथ खरीदार ज़ायदाद की पड़ताल करता है)

14. दस्तावेज़ों पर दस्तख़त (खरीदार कर्ज़ के काग़जातों और एस्क्रो निर्देशों पर दस्तख़त करता है और टाइटल कंपनी के पास आखिरी भुगतान जमा करा देता है)

15. एस्क्रो एजेंट कर्ज़दाता को दस्तावेज़ लौटा देता है।

16. कर्ज़दाता की रकम को इलैक्ट्रॉनिक तरीके से टाइटल कंपनी को भेज दिया जाता है (रकम का लेनदेन कर्ज़दाता और टाइटल कंपनी के बीच होता है)

17. काउंटी ऑफिस में डीड को रजिस्टर कराया जाता है (इससे ज़ायदाद का मालिकाना हक खरीदार को मिल जाता है)

18. सौदा पूरा हो जाता है (लेखांकन को अंतिम रूप दिया जाता है और एकाउंट स्टेटमेंट भेज दी जाती है)

19. घर की चाबियां नए मालिक को सौंप दी जाती हैं।

 

 
  pages 1 2 3  
     
 
  Powered by LocalBizNetwork